Author: Dr. B. R. Ambedkar
Baudh Dharma ka Saar(बौद्ध धर्म का सार)
बौद्ध धर्म का सार डॉ. भीमराव आंबेडकर के बौद्ध चिंतन पर आधारित एक महत्वपूर्ण कृति है, जिसमें बौद्ध धर्म को तर्क, नैतिकता, समानता और मानव कल्याण का धर्म बताया गया है। इस पुस्तक में बुद्ध के जीवन, उनके उपदेशों तथा धम्म के मूल सिद्धांतों का सरल एवं व्यावहारिक विवेचन किया गया है। आंबेडकर के अनुसार बौद्ध धर्म का उद्देश्य केवल मोक्ष प्राप्त करना नहीं, बल्कि मनुष्य के जीवन में दुःख, अन्याय, भेदभाव और अंधविश्वास का अंत करना है। वे करुणा, प्रज्ञा और समता को धम्म का आधार मानते हैं तथा जाति-भेद, ऊँच-नीच और सामाजिक असमानता का स्पष्ट विरोध करते हैं। पुस्तक में चार आर्य सत्य, अष्टांगिक मार्ग, मध्यम मार्ग, नैतिक आचरण और आत्मअनुशासन की महत्ता को व्यावहारिक दृष्टि से समझाया गया है। आंबेडकर बौद्ध धर्म को स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्यों पर आधारित मानवीय जीवन-दर्शन के रूप में प्रस्तुत करते हैं। यह कृति पाठकों को सत्य, विवेक, सहिष्णुता और सामाजिक न्याय की प्रेरणा देती है तथा बताती है कि बौद्ध धर्म केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि मानव समाज में शांति, नैतिकता और समानता स्थापित करने का प्रभावी मार्ग है।
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ISBN : 9789380089249
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Publication: Divyansh Publication
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बौद्ध धर्म का सार डॉ. भीमराव आंबेडकर के बौद्ध चिंतन पर आधारित एक महत्वपूर्ण कृति है, जिसमें बौद्ध धर्म को तर्क, नैतिकता, समानता और मानव कल्याण का धर्म बताया गया है। इस पुस्तक में बुद्ध के जीवन, उनके उपदेशों तथा धम्म के मूल सिद्धांतों का सरल एवं व्यावहारिक विवेचन किया गया है। आंबेडकर के अनुसार बौद्ध धर्म का उद्देश्य केवल मोक्ष प्राप्त करना नहीं, बल्कि मनुष्य के जीवन में दुःख, अन्याय, भेदभाव और अंधविश्वास का अंत करना है। वे करुणा, प्रज्ञा और समता को धम्म का आधार मानते हैं तथा जाति-भेद, ऊँच-नीच और सामाजिक असमानता का स्पष्ट विरोध करते हैं। पुस्तक में चार आर्य सत्य, अष्टांगिक मार्ग, मध्यम मार्ग, नैतिक आचरण और आत्मअनुशासन की महत्ता को व्यावहारिक दृष्टि से समझाया गया है। आंबेडकर बौद्ध धर्म को स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्यों पर आधारित मानवीय जीवन-दर्शन के रूप में प्रस्तुत करते हैं। यह कृति पाठकों को सत्य, विवेक, सहिष्णुता और सामाजिक न्याय की प्रेरणा देती है तथा बताती है कि बौद्ध धर्म केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि मानव समाज में शांति, नैतिकता और समानता स्थापित करने का प्रभावी मार्ग है।
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