Author: Dr Satya Singh
Bal Vikas Or Bal Manovigyan(बाल विकास और बाल मनोविज्ञान)
बाल विकास और बाल मनोविज्ञान डॉ. सत्य सिंह द्वारा लिखित एक महत्वपूर्ण शैक्षिक पुस्तक है, जिसमें बालक के शारीरिक, मानसिक, संवेगात्मक, सामाजिक और बौद्धिक विकास का वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक में गर्भावस्था से लेकर किशोरावस्था तक बाल विकास की विभिन्न अवस्थाओं, उनकी विशेषताओं तथा विकास को प्रभावित करने वाले आनुवंशिक एवं पर्यावरणीय कारकों का सरल भाषा में वर्णन किया गया है। लेखक ने बाल मनोविज्ञान के प्रमुख सिद्धांतों, अधिगम की प्रक्रियाओं, बुद्धि, स्मृति, कल्पना, रुचि, अभिप्रेरणा, व्यक्तित्व तथा सृजनात्मकता जैसे विषयों को उदाहरणों सहित स्पष्ट किया है। इसमें प्रमुख मनोवैज्ञानिकों के सिद्धांतों का भी संक्षिप्त एवं उपयोगी परिचय दिया गया है, जिससे पाठकों को विषय की गहरी समझ प्राप्त होती है। पुस्तक में बालकों की व्यक्तिगत भिन्नताओं, विशेष आवश्यकताओं, अनुशासन, नैतिक विकास तथा शिक्षण की प्रभावी विधियों पर भी विशेष प्रकाश डाला गया है। यह कृति शिक्षक-प्रशिक्षुओं, बी.एड., डी.एल.एड., बी.टी.सी., सीटीईटी, यूपीटीईटी तथा अन्य शिक्षक भर्ती परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी है। सरल भाषा, व्यवस्थित प्रस्तुति और व्यावहारिक दृष्टिकोण के कारण यह पुस्तक बाल शिक्षा और मनोविज्ञान के अध्ययन हेतु एक विश्वसनीय एवं उपयोगी मार्गदर्शिका सिद्ध होती है।
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ISBN : 9789389245608
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Publication: Divyansh Publication
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बाल विकास और बाल मनोविज्ञान डॉ. सत्य सिंह द्वारा लिखित एक महत्वपूर्ण शैक्षिक पुस्तक है, जिसमें बालक के शारीरिक, मानसिक, संवेगात्मक, सामाजिक और बौद्धिक विकास का वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक में गर्भावस्था से लेकर किशोरावस्था तक बाल विकास की विभिन्न अवस्थाओं, उनकी विशेषताओं तथा विकास को प्रभावित करने वाले आनुवंशिक एवं पर्यावरणीय कारकों का सरल भाषा में वर्णन किया गया है। लेखक ने बाल मनोविज्ञान के प्रमुख सिद्धांतों, अधिगम की प्रक्रियाओं, बुद्धि, स्मृति, कल्पना, रुचि, अभिप्रेरणा, व्यक्तित्व तथा सृजनात्मकता जैसे विषयों को उदाहरणों सहित स्पष्ट किया है। इसमें प्रमुख मनोवैज्ञानिकों के सिद्धांतों का भी संक्षिप्त एवं उपयोगी परिचय दिया गया है, जिससे पाठकों को विषय की गहरी समझ प्राप्त होती है। पुस्तक में बालकों की व्यक्तिगत भिन्नताओं, विशेष आवश्यकताओं, अनुशासन, नैतिक विकास तथा शिक्षण की प्रभावी विधियों पर भी विशेष प्रकाश डाला गया है। यह कृति शिक्षक-प्रशिक्षुओं, बी.एड., डी.एल.एड., बी.टी.सी., सीटीईटी, यूपीटीईटी तथा अन्य शिक्षक भर्ती परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी है। सरल भाषा, व्यवस्थित प्रस्तुति और व्यावहारिक दृष्टिकोण के कारण यह पुस्तक बाल शिक्षा और मनोविज्ञान के अध्ययन हेतु एक विश्वसनीय एवं उपयोगी मार्गदर्शिका सिद्ध होती है।
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