An Ban

आचार्य चतुरसेन शास्त्री का 'अन बन' एक सामाजिक और मनोवैज्ञानिक उपन्यास है, जिसमें पारिवारिक संबंधों, मानवीय स्वभाव, अहंकार, प्रेम, त्याग और आपसी मतभेदों का अत्यंत यथार्थ चित्रण किया गया है। उपन्यास का शीर्षक ही संकेत करता है कि मनुष्य के जीवन में बनने और बिगड़ने वाले संबंध किस प्रकार उसके सुख-दुख का आधार बनते हैं।

कहानी ऐसे पात्रों के इर्द-गिर्द घूमती है जिनके बीच गलतफहमियाँ, स्वार्थ, अभिमान और संकीर्ण सोच के कारण तनाव उत्पन्न होता है। लेखक ने दिखाया है कि छोटी-छोटी बातों पर उत्पन्न होने वाले विवाद समय के साथ बड़े संघर्ष का रूप ले लेते हैं और परिवार तथा समाज की शांति को भंग कर देते हैं। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि धैर्य, प्रेम, सहनशीलता और संवाद के माध्यम से सबसे जटिल मतभेदों का समाधान संभव है।

उपन्यास में मानव मन की कमजोरियों और उसकी अच्छाइयों का संतुलित चित्रण मिलता है। पात्र परिस्थितियों से संघर्ष करते हुए आत्मचिंतन करते हैं और धीरे-धीरे यह समझते हैं कि अहंकार और हठ किसी भी संबंध को कमजोर बना देते हैं, जबकि विश्वास और संवेदनशीलता रिश्तों को मजबूत बनाते हैं। लेखक ने सामाजिक मूल्यों, पारिवारिक मर्यादाओं और नैतिक आदर्शों को कथा के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है।

'अन बन' केवल पारिवारिक विवादों की कहानी नहीं है, बल्कि यह मनुष्य के भीतर चलने वाले भावनात्मक संघर्ष का भी चित्रण है। आचार्य चतुरसेन ने सरल, प्रवाहपूर्ण और प्रभावशाली भाषा में यह संदेश दिया है कि जीवन में स्थायी सुख पाने के लिए परस्पर सम्मान, क्षमा, सहयोग और प्रेम का मार्ग अपनाना आवश्यक है। यही गुण व्यक्ति, परिवार और समाज में सामंजस्य स्थापित करते हैं तथा जीवन को अधिक सुखद और सार्थक बनाते हैं।

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ISBN : 9789376705726

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Publication: Kitabking
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आचार्य चतुरसेन शास्त्री का 'अन बन' एक सामाजिक और मनोवैज्ञानिक उपन्यास है, जिसमें पारिवारिक संबंधों, मानवीय स्वभाव, अहंकार, प्रेम, त्याग और आपसी मतभेदों का अत्यंत यथार्थ चित्रण किया गया है। उपन्यास का शीर्षक ही संकेत करता है कि मनुष्य के जीवन में बनने और बिगड़ने वाले संबंध किस प्रकार उसके सुख-दुख का आधार बनते हैं।

कहानी ऐसे पात्रों के इर्द-गिर्द घूमती है जिनके बीच गलतफहमियाँ, स्वार्थ, अभिमान और संकीर्ण सोच के कारण तनाव उत्पन्न होता है। लेखक ने दिखाया है कि छोटी-छोटी बातों पर उत्पन्न होने वाले विवाद समय के साथ बड़े संघर्ष का रूप ले लेते हैं और परिवार तथा समाज की शांति को भंग कर देते हैं। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि धैर्य, प्रेम, सहनशीलता और संवाद के माध्यम से सबसे जटिल मतभेदों का समाधान संभव है।

उपन्यास में मानव मन की कमजोरियों और उसकी अच्छाइयों का संतुलित चित्रण मिलता है। पात्र परिस्थितियों से संघर्ष करते हुए आत्मचिंतन करते हैं और धीरे-धीरे यह समझते हैं कि अहंकार और हठ किसी भी संबंध को कमजोर बना देते हैं, जबकि विश्वास और संवेदनशीलता रिश्तों को मजबूत बनाते हैं। लेखक ने सामाजिक मूल्यों, पारिवारिक मर्यादाओं और नैतिक आदर्शों को कथा के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है।

'अन बन' केवल पारिवारिक विवादों की कहानी नहीं है, बल्कि यह मनुष्य के भीतर चलने वाले भावनात्मक संघर्ष का भी चित्रण है। आचार्य चतुरसेन ने सरल, प्रवाहपूर्ण और प्रभावशाली भाषा में यह संदेश दिया है कि जीवन में स्थायी सुख पाने के लिए परस्पर सम्मान, क्षमा, सहयोग और प्रेम का मार्ग अपनाना आवश्यक है। यही गुण व्यक्ति, परिवार और समाज में सामंजस्य स्थापित करते हैं तथा जीवन को अधिक सुखद और सार्थक बनाते हैं।

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Acharya Chatursen Shastri

Acharya Chatursen Shastri (1891–1960) was one of the most distinguished writers of Hindi literature. A scholar of Ayurveda, history, religion, and Indian culture, he authored more than 200 books, including novels, stories, essays, and historical works. His writings are known for their deep research, vivid storytelling, and insightful portrayal of India\'s past. Some of his most celebrated novels include Vaishali Ki Nagarvadhu, Somnath, and Vayam Rakshamah. Through his literary contributions, Acharya Chatursen played a significant role in enriching Hindi literature and promoting India\'s cultural heritage.\r\n
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